ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

“जड़े”

उसने 'ज़मीन' साफ़ कर खुद के माकन और दीवारे बनाली, बिना सोचे ये की एक जान अब भी जमी है उसी ज़मीन में, उस जान ने भी ज़िंदा रहने अपनी…

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