ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

” पहचान पाये “

मकानों को टुटा बिखरा देखा है ? खून के धब्बों से रंगी ज़मीन? खम्बों पर लटकते अध नंगे शरीर? देखा ज़रूर होगा, कई किस्से होते हैं ऐसे, मज़हब के नाम…

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