ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

“Yatra”

पेड़ों की गुफा में, आधी छांव आधी धुप से, गुजरता वो बंजारा, कभी तो कंही पहुंचेगा...

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