ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

“खामोशियाँ”

दोनों काली मलमल ओढ़े, एक पहाड़ की चोटी पर, चुपचाप से बैठे थे... शायद एक दूसरे की, ख़ामोशी बाँट रहे थे... एक की "ख़ामोशी" थक चुके ज़ख्मों की थी, तो…

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“बारिश”

घर से निकलते ही, यादों की जोरों से बारिश होने लगी, मैंने छतरी साथ नहीं राखी थी, पूरा ही भीग गया, कुछ बुँदे मखमली चादर ओढ़े हुए थे, तो कुछ…

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इश्क़ की मिश्री

इश्क़ वाली दुकान से, इश्क़ की मिश्री लाया था, कुछ हिस्से में चींटी लग गई, कुछ बेस्वाद सा हो गया, अब उस दुकान की तरफ रुख नहीं मेरा…

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“Khawish”

उसके बाद तुम्हारी ख्वाहिशे पूरी करंगे, वो अधूरे सपने और टूटे तारों को मिलके जोड़ेंगे, फिर एक नया आसमान बनायंगे कुछ हमारे तो कुछ नारंगी नील रंगो से उसे भरेंगे,…

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“बुरी आदत”

इस बार कुछ अलग हुआ, मेरी आदत ने मुझे छोड़ दिया, वो आदत तुम थी... बड़ा इठलाई थी ना मुझे छोड़ते वक़्त, मैंने भी कम ना था, मैंने तुम्हे बुरी…

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