ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

वो सुनहरे अल्फ़ाज़ों की नज़्म बन गई – कविताएँ

1.पहला ख़याल  मैंने मोहब्बत की है  तुम्हें पाने की ज़िद नहीं, तुम मेरी तख़्लीक़ का  पहला ख़याल हो  कोई आदत नहीं, दूरियों से ख़ामोशी  में की गई मोहब्बत  भी किसी से…

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