ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

यक्ष के प्रश्न और युधिष्ठिर के उत्तर-महाभारत कथा

युधिष्ठिर और यक्ष कथा  पांडवों के वनवास के बारह वर्ष समाप्त होने वाले थे। इसके बाद एक वर्ष के अज्ञातवास की चिंता युधिष्ठिर को सता रही थी। इसी चिंता में…

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