ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

“इश्क़ की मिश्री” पाँच कविताएँ – Shailism

1. "बारिश"  घर से निकलते ही, यादों की जोरों से बारिश होने लगी, छतरी मैंने साथ नहीं रखी थी, पूरा ही भीग गया, कुछ बूँदे मखमली चादर ओढ़े हुई थी  ,…

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