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मुझे मंज़ूर नहीं…

मैं बेजान ही सही, पर तुमसा ज़िंदा, होना मुझे मंज़ूर नहीं... मैं पाताल ही सही, पर तुमसा अभिमानी आकाश, होना मुझे मंज़ूर नहीं... मैं अँधेरा ही सही, पर तुमसा मतलबी…
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