ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

” मुझे मंज़ूर नहीं “

मैं बेजान ही सही, पर तुमसा ज़िंदा, होना मुझे मंज़ूर नहीं... मैं पाताल ही सही, पर तुमसा अभिमानी आकाश, होना मुझे मंज़ूर नहीं... मैं अँधेरा ही सही, पर तुमसा मतलबी…

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