ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

वो अब बड़ी हो चुकी है-कविता

वो मोहल्ले की गलियाँ  जिन्हें अपने नन्हें क़दम से नापा करती थी,  वो मकान की दीवारें  जिस पर कलम से लकीरें खिंचा करती थी,  वो माँ की बरनियाँ जिससे मुरब्बा…

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