ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

“गोश्त”

अब आदत हो गई थी उसे, किवाड़ खुलने पर, अब वो सहमा नहीं करती थी, रात भर गोश्त के टुकड़े सी वो पड़ी रहती थी, कुत्ते आते और चाट जाते…

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“एक दिन”

जो धूल पैरों पर है लगी तेरे, वो जानती है, तू उसे ज़मीन बना देगा, इतनी आग है तुझमें, कि एक दिन, तू आसमान पिघला उस पर बरसा देगा।  

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