ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
वो सुनहरे अल्फ़ाज़ों की नज़्म बन गई – कविताएँ

वो सुनहरे अल्फ़ाज़ों की नज़्म बन गई – कविताएँ

1.पहला ख़याल 

मैंने मोहब्बत की है 

तुम्हें पाने की ज़िद नहीं,

तुम मेरी तख़्लीक़ का 

पहला ख़याल हो 

कोई आदत नहीं,

दूरियों से ख़ामोशी 

में की गई मोहब्बत 

भी किसी से कम नहीं।

2. जी लेना चाहता हूँ 

वो सूखे पत्ते 

ज़मीन पर पड़े 

उसका इंतज़ार करते है 

वो ठंडी हवा 

जब गुज़रती है 

वो सिहर कर 

झूमने लगते है,

तुम भी मेरे लिए

ठंडी हवा का झोंखा हो,

कभी मेरे पास से गुज़रना,

एक बार मैं भी 

जी लेना चाहता हूँ 

3. सुकून

झील के उस पार

बर्फ़ से ढके पहाड़ 

के ऊपर से गुज़रते 

उन बंजारे बादलों

को वो देख रही थी

और मैं उसे,

हम दोनो ही उस पल 

सुकून में बैठे

अपनेअपने नज़ारों में 

खोए हुए थे।

4. धड़क

ज़ुल्फ़ बिखेर 

लब खोल 

वो हंस रही थी,

हज़ारों जहान की 

किरणे उसकी आँखों   

से झाँक रही थी,

दो दिल थे उसके पास 

एक सिने में धड़क रहा था

दुजा उसकी छूँवन में 

शर्म से लाल हो लटक रहा था,

वो भी दमक रही थी,

जाने ज़िंदगी आज क्या 

उसके लिए ले कर आइ थी।

Please like facebook page:https://www.facebook.com/shailism/

नज़्म kavita shailism

Leave a Reply

Close Menu
%d bloggers like this: