ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
मंदिर-मस्जिद और रेत का मकान
By Arshad Mohsin

मंदिर-मस्जिद और रेत का मकान

रेत का मकान

वो बच्चा रेत का मकान बनाता 

समुन्दर आता और उसे तोड़ जाता, 

यह शिलशिला यूँही चलता रहा 

मकान बनता और बिगड़ता रहा ,

मगर कुछ वक़्त बाद बच्चा चीड़ गया, 

पूरी ताक़त अपने छोटे से शरीर में ला

वो तन कर खड़ा हो गया,

और समुन्दर को चीड़ कर बोला 

ना तू हिंदू है ना मुसलमान 

फिर क्यों तोड़ता है तू मेरा मकान, 

बता किस मज़हब से है तेरा वास्ता?

गीता से या क़ुरान पर है तेरी आस्था

उस रोज़ समुन्दर शर्म से पीछे हट गया,

वो बच्चा फिर रेत का मकान बनाने में जुट गया

* बेवजह बारिश

कोई मंदिर के लिए लड़ता है 

तो कोई मस्जिद के लिए

कोई भूख से लड़ता है

तो कोई सर छुपाने एक छत के लिए

शायद यही देख बेवजह बारिश हो जाया करती है

* बीच की दीवार

दो बच्चे माटी में खेल रहे थे,

एक ने मिट्टी का मंदिर 

तो दूसरे ने मस्जिद बनाया ,

फिर दोनो के बीच में 

एक दीवार भी उठाया

एक ने श्री राम का घोष लगाया 

दूसरे ने अल्लाह हु अकबर का शोर मचाया,

तीसरा बच्चा पास बैठे देख रहा था,

दोनो की नज़र उस पर पड़ी 

तू भी खेलेगा भाई ?” उन्होंने पूछा

उसने हाँ में सर अपना हिलाया,

तू किस ओर आएगा”, उससे पूछा,

वो चुप चाप ही रहा कुछ ना कहा,

“क्या तू अपना धर्म बतलाएगा?”

“उसने कहा अनाथ हूँ पता नहीं” 

वो कुछ देर सोचे और फिर कहा  

ले मंदिर भी तेरा और मस्जिद भी 

उसने कहा “अगर दोनो है मेरा

तो फिर बीच में दीवार है किसका?” 

तीनो ने उस दिन एक दीवार गिराया।

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