ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

“कहानी एक बंजारे और चांदनी की”

वो चांदनी से प्यार करता था, जानते हुए की दाग से लिपटे चाँद की हैं वो, काले बादल दरमियान दोनों के रोके पहाड़ों से हैं खड़े, जानते हुए की तारों…

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“बारिश”

घर से निकलते ही, यादों की जोरों से बारिश होने लगी, मैंने छतरी साथ नहीं राखी थी, पूरा ही भीग गया, कुछ बुँदे मखमली चादर ओढ़े हुए थे, तो कुछ…

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