ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

“Khawish”

उसके बाद तुम्हारी ख्वाहिशे पूरी करंगे, वो अधूरे सपने और टूटे तारों को मिलके जोड़ेंगे, फिर एक नया आसमान बनायंगे कुछ हमारे तो कुछ नारंगी नील रंगो से उसे भरेंगे,…

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“बुरी आदत”

इस बार कुछ अलग हुआ, मेरी आदत ने मुझे छोड़ दिया, वो आदत तुम थी... बड़ा इठलाई थी ना मुझे छोड़ते वक़्त, मैंने भी कम ना था, मैंने तुम्हे बुरी…

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इंतज़ार राम का

नन्हे राम ने चौखट पर दिया रखती हुई अपनी माँ से पूछा ”माँ दिवाली क्यों मनाते हैं ?” माँ ने मुस्कुराते हुए कहा ”आज के दिन राम अपने घर लौटे…

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