ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

“कठपुतलिया”

कुछ कठपुतलिया थी वँहा, रंगीन कपड़ों से सजी थी, मगर किसी की उँगलियों से वो बंधी थी, कुछ बेजान सी थी, तो कुछ सांस ले रही थी...

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“झूलता वक़्त”
Shailism

“झूलता वक़्त”

अक्सर देखा है "वक़्त" को झूलते हुए मैंने, कभी दीवार पर तो कभी धागों का सहारा लिए बाजार में, पर समझ नहीं आता की जो झूल रहा है वो वक़्त…

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“Yatra”

पेड़ों की गुफा में, आधी छांव आधी धुप से, गुजरता वो बंजारा, कभी तो कंही पहुंचेगा...

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“खिलोने वाला”

काला था वो मगर, रंग बेच रहा था, नंगे पांव में छाले थे उसके मगर, चकरी वाले पंख सोप रहा था, नकाब भी थे उसके पास मगर, चेहरे पर चढ़ा…

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