ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
मंटो की पाँच लघु कथाएँ

मंटो की पाँच लघु कथाएँ

सआदत हसन मंटो (1912 – 1955) उर्दू लेखक थे। जो कहानीकार के रूप में अपनी लघु कथाओं, ठंडा गोश्त, बू, खोल दो और टोबा टेक सिंह के लिए प्रसिद्ध हुए। वे फिल्म और रेडिया पटकथा लेखक और पत्रकार भी थे। अपने जीवनकाल में उन्होंने एक उपन्यास, बाइस लघु कथा संग्रह, रेडियो नाटक के पांच संग्रह, रचनाओं के तीन संग्रह और व्यक्तिगत रेखाचित्र के दो संग्रह प्रकाशित किए।

1. घाटे का सौदा (मंटो)

दो दोस्तों ने मिलकर दस-बीस लड़कियों में से एक लड़की चुना। और बयालीस रुपए देकर उसे खरीद लिया। रात गुजार कर एक दोस्त ने उस लड़की से पूछा “तुम्हारा क्या नाम है?” लड़की ने अपना नाम बताया तो वह भिन्ना गया “हमसे तो कहा गया था कि तुम दूसरे मजहब की हो।”

लड़की ने जवाब दिया-“उसने झूठ बोला था।”

यह सुनकर वह दौड़ा-दौड़ा अपने दोस्त के पास गया और कहने लगा-“उस हरामजादे ने हमारे साथ धोखा किया है। हमारे ही मजहब की लड़की थमा दी। चलो, वापस कर आएँ।”

2. करामात (मंटो)

लूटा हुआ माल बरामद करने के लिए पुलिस ने छापे मारने शुरु किए। लोग डर के मारे लूटा हुआ माल रात के अंधेरे में बाहर फेंकने लगे। कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने अपना माल मौक़ा पाकर अपने से अलहदा कर दिया, ताकि क़ानूनी गिरफ़्त से बचे रहें। 

एक आदमी को बहुत दिक़्कत पेश आई। उसके पास शक्कर की दो बोरियाँ थी, जो उसने पंसारी की दूकान से लूटी थीं। एक तो वह जूँ-तूँ रात के अंधेरे में पास वाले कुएँ में फेंक आया। लेकिन जब दूसरी उसमें डालने लगा ख़ुद भी साथ चला गया।शोर सुनकर लोग इकट्ठे हो गये. कुएँ में रस्सियाँ डाली गईं। जवान नीचे उतरे और उस आदमी को बाहर निकाल लिया गया। लेकिन वह चंद घंटो के बाद मर गया।

दूसरे दिन जब लोगों ने इस्तेमाल के लिए उस कुएँ में से पानी निकाला तो वह मीठा था। उसी रात उस आदमी की क़ब्र पर दीए जल रहे थे।

3. जैली (मंटो)

सुबह छः बजे पैट्रोल पंप के पास हाथ गाड़ी में बर्फ़ बेचने वाले के छुरा घोंपा गया। सात बजे तक उस की लाश लुक बिछी सड़क पर पड़ी रही और उस पर बर्फ़ पानी बन बन गिरती रही।  सवा सात बजे पुलिस लाश उठा कर ले गई। बर्फ़ और ख़ून वहीं सड़क पर पड़े रहे।  एक टांगा पास से गुज़रा। बच्चे ने सड़क पर जीते जीते ख़ून के जमे हुए चमकीले लोथड़े की तरफ़ देखा। उस के मुँह में पानी भर आया। अपनी माँ का बाज़ू खींच कर बच्चे ने उंगली से उस की तरफ़ इशारा किया “देखो मम्मी जैली”!

4. तक़्सीम (मंटो)

एक आदमी ने अपने लिए लकड़ी का एक बड़ा संदूक़ मुंतख़ब किया जब उसे उठाने लगा तो वो अपनी जगह से एक इंच भी न हिला।

एक शख़्स ने जिसे शायद अपने मतलब की कोई चीज़ मिल ही नहीं रही थी। संदूक़ उठाने की कोशिश करने वाले से कहा “मैं तुम्हारी मदद करूं”?

संदूक़ उठाने की कोशिश करने वाला इमदाद लेने पर राज़ी हो गया। उस शख़्स ने जिसे अपने मतलब की कोई चीज़ मिल नहीं रही थी। अपने मज़बूत हाथों से संदूक़ को जुंबिश दी और उठा कर अपनी पीठ पर धर लिया, दूसरे ने सहारा दिया, दोनों बाहर निकले। संदूक़ बहुत भारी था। उस के वज़न के नीचे उठाने वाले की पीठ चटख़ रही थी। टांगें दोहरी होती जा रही थीं मगर इनाम की तवक़्क़ो ने इस जिस्मानी मशक़्क़त का एहसास नीम मुर्दा कर दिया था।  संदूक़ उठाने वाले के मुक़ाबले में संदूक़ को सहारा करने वाला बहुत ही कमज़ोर था। सारा रस्ता वो सिर्फ़ एक हाथ से सहारा दे कर अपना हक़ क़ायम रखता रहा। जब दोनों महफ़ूज़ मक़ाम पर पहुंच गए तो संदूक़ को एक तरफ़ रख कर सारी मशक़्क़त बर्दाश्त करने वाले ने कहा। “बोलो। इस संदूक़ के माल में से मुझे कितना मिलेगा”।

संदूक़ पर पहली नज़र डालने वाले ने जवाब दिया। “एक चौथाई”।

“बहुत कम है”।

“कम बिल्कुल नहीं ज़्यादा है…… इस लिए कि सब से पहले मैंने ही इस पर हाथ डाला था”।

“ठीक है, लेकिन यहां तक इस कमर तोड़ बोझ को उठा के लाया कौन है”?

“आधे आधे पर राज़ी होते हो”?

“ठीक है……खोलो संदूक़”।

संदूक़ खोला गया तो इस में से एक आदमी बाहर निकला। हाथ में तलवार थी। बाहर निकलते ही उस ने दोनों हिस्सा दारों को चार हिस्सों में तक़सीम कर दिया

5. सॉरी (मंटो)

संदूक़ खोला गया तो इस में से एक आदमी बाहर निकला। हाथ में तलवार थी  बाहर निकलते ही उस ने दोनों हिस्सा दारों को चार हिस्सों में तक़सीम कर दिया।

छुरी पेट चाक करती हुई नाफ़ के नीचे तक चली गई। इज़ार-बंद(पायजमे का नाड़ा) कट गया। छुरी मारने वाले के मुँह से दफ़्अतन कलमा-ए-तअस्सुफ़ निकला “चे चे चे चे…मिसटेक हो गया”।

मंटो, shailism
नवाजुद्दीन सिद्दीक़ी as मंटो।

 

#मंटो के जीवन पर बनाई गई फ़िल्में।

1 MantoM (2018)  फ़िल्म का निर्देशन नंदिता दास ने किया है। और मंटो का किरदार नवाजुद्दीन सिद्दीक़ी ने निभाया है।

2 Manto (2015) यह पाकिस्तानी फ़िल्म है। Sarmad Khoosat फ़िल्म के director है और उन्होंने ही मंटो का किरदार निभाया हैं।

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