ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
मैं ना टूटूँगा-कविताएँ

मैं ना टूटूँगा-कविताएँ

1.

पंखों को तो टूटना ही था,

तुमने लोगों की सोच का बोझ

जो इस पर डाल दिया था।

2.

जिस्म को बाँधा जा सकता है मगर

जो ख़यालों को बाँध सके

ऐसी कोई ज़ंजीर मिले

तो ले कर आओ।

3.

इस तपते जिस्म पर

तू पानी मत डाल,

आदत डाल,

तभी तू कुंदन बनेगा।

4.

मैंने ख़्वाब को चुना है,

ख़्वाब ने मुझे नहीं,

वो टूट भी गया तो क्या,

मैं दूसरा फिर चुन लूँगा,

पर ख़ुद मैं ना टूटूँगा।

5.

जो धूल पैरों पर है लगी तेरे,

वो जानती है,

तू उसे ज़मीन बना देगा,

इतनी आग है तुझमें

कि एक दिन

तू असमां पिघला उस पर बरसा देगा।

PC: https://scene360.com/art/48811/the-digital-human-body/

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