ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
जब मेरा ख़ून जलता है

जब मेरा ख़ून जलता है

वो बिकाऊ मीडिया, 
आदमी के बनाए समाज की रीतियाँ,
Fake feminists
वो फ़िजुल के human rights 
और तरह-तरह के NGO की खुदगरजियाँ,
वो भूखे celebrities की बिन जाने
हर बात में आने वाली राय की प्रसिद्धियाँ,
और बिन सोचे समझे पोस्ट share कर
सज़ा सुनाने आइ मुख़ोटों में केद वो जनसंख्या,
Twitter से शुरू हो बस facebook तक
ही रहती है जिनकी जिमेदारियाँ…

आप सभी लोगों को सुन, देख कर
जब मेरा ख़ून जलता है,
तब मैं शहर से बाहर सेर में निकल जाता हूँ,
साथ मेरे गली का वो बूढ़ा कुत्ता भी आजाता है,
इसे भी आप सब कुछ ख़ास पसंद नहीं, 
ऐसा मालूम होता है।
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