ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
ख़त
Unwind By Arti Chauhan

ख़त

“आपके बेटे का कोई ख़त नहीं आया माँ जी “डेस्क के पीछे बैठे एक आदमी ने कहा।”
यह सुन उसकी मोतिया बिंद वाली नज़र झुक जाती है।और वह लकड़ी के एक डण्डे का सहारा लिए कमज़ोर कदमों से बहार की तरफ लौट जाती है।
पास ही बैठा दूसरा आदमी “कौन है यह बुढ़िया ?, रोज यँहा चली आती है। “
पहला आदमी ” रोशन ठाकुर की माँ है।”
दूसरा आदमी “पर उसे शहिद हुए तो दस साल हो चुके हैं।”

by Shailism 

Painting by https://fineartamerica.com/featured/unwind-arti-chauhan.html

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