ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
“कठपुतलिया”

“कठपुतलिया”

कुछ कठपुतलिया थी वँहा,
रंगीन कपड़ों से सजी थी,
मगर किसी की उँगलियों से वो बंधी थी,
कुछ बेजान सी थी, तो कुछ सांस ले रही थी…

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