ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
“झूलता वक़्त”
Shailism

“झूलता वक़्त”

अक्सर देखा है “वक़्त” को झूलते हुए मैंने,
कभी दीवार पर तो कभी धागों का सहारा लिए बाजार में,
पर समझ नहीं आता की जो झूल रहा है वो वक़्त ही है,
या फिर मैं जो किल में अटका घड़ी की सुई सा घूम रहा हूँ…

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