“Intazar Raam Ka”

नन्हे राम ने चौखट पर दीया रखती हुई अपनी माँ से पूछा ” माँ दिवाली क्यों मानते हैं?”
माँ ने मुस्कुराते हुए कहा ” आज के दिन राम जी आपने घर लौटे थे”
नन्हा राम थोड़ी देर सोचने के बाद बोला ” पर मैं तो कभी घर छोड़ कर गया ही नहीं.”

इस बात को याद करते हुए वो बूढ़ी जिसकी आँखों की रौशनी अब मोतिया बिंद की वजह से कम हो चुकी है,
अपने अंशु पूछते हुए उसी चौखट पर दीया रखती है. पर इस बार अयोध्या के राम के लिए नहीं बल्कि आपने नन्हे राम के लिए जो शरहद पर बन्दुक थामे दीवार जैसा खड़ा है. ताकि सारा देश सुकून से दिवाली मना सके.

पर क्या वो बूढ़ी माँ अपने राम को फिर देख पायगी ? क्या वो लौटेगा ?

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