ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
इंतज़ार राम का

इंतज़ार राम का

नन्हे राम ने चौखट पर दिया रखती हुई अपनी माँ से पूछा ”माँ दिवाली क्यों मनाते हैं ?”
माँ ने मुस्कुराते हुए कहा ”आज के दिन राम अपने घर लौटे थे।”
नन्हा राम थोड़ी देर सोचने के बाद बोला ”पर मैं तो कभी घर छोड़ कर गया ही नहीं।” और उसकी बात सुनते ही वो ज़ोरों से हँसने लगी।

इस बात को 15 साल बीत चुके है। अब वो बूढ़ी हो चुकी है।आँखों की रौशनी अब कम हो चुकी है।आज भी दिवाली है।और वो आज भी चौखट पर दीया रख रही है। पर इस बार अयोध्या के राम के लिए नहीं बल्कि अपने नन्हे राम के लिए जो सरहद पर बन्दुक थामे दीवार जैसा खड़ा है। ताकि सारा देश सुकून से अपने परिवार के साथ ख़ुशियों के दीप जला सकें। और वो माँ पिछले दो बार की तरह इस बार भी अपने नन्हें राम के घर आने का इंतज़ार कर रही है।

by Shailism 

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