ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
भगत सिंह- एक क्रांतिकारी कवि की जेल डायरी
Art by https://www.instagram.com/jay_kullar/

भगत सिंह- एक क्रांतिकारी कवि की जेल डायरी

19 साल की उम्र में ही उसकी शादी तय हो गई थी। किंतु उसने यह बोल कर घर छोड़ दिया कि “आज़ादी ही उसकी दुल्हन है।” और देश की आज़ादी…

Continue Reading

मैं नास्तिक क्यों हूँ – भगत सिंह

स्वतन्त्रता सेनानी बाबा रणधीर सिंह 1930-31के बीच लाहौर के सेन्ट्रल जेल में कैद थे। वे एक धार्मिक व्यक्ति थे जिन्हें यह जान कर बहुत कष्ट हुआ कि भगतसिंह का ईश्वर…

Continue Reading
  • 1
  • 2
Close Menu