ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

“डर”

"डर" लगता है ना, मुझे भी लगता था, पर मैं उसे निगल गया, डर अब मुझसे डरता है, आपने सुकून के लिए अब वो, मेरी एक फूंक के लिए तड़पता…

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” पहचान पाये “

मकानों को टुटा बिखरा देखा है ? खून के धब्बों से रंगी ज़मीन? खम्बों पर लटकते अध नंगे शरीर? देखा ज़रूर होगा, कई किस्से होते हैं ऐसे, मज़हब के नाम…

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“जड़े”

उसने 'ज़मीन' साफ़ कर खुद के माकन और दीवारे बनाली, बिना सोचे ये की एक जान अब भी जमी है उसी ज़मीन में, उस जान ने भी ज़िंदा रहने अपनी…

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“एक”
Shailism

“एक”

क्या हम किताबों में लिखी बातों को जानते हैं ?, हाँ ?, तो फिर क्यों "हम सब एक" को नहीं मानते हैं ?, क्यों हम तीन और चार हो जाया…

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“चार नन्ही ऑंखें और एक जंगल”

चार दीवारों की एक रंगीन खिड़की से, अँधेरे में बंद चार नन्ही ऑंखें झाँक रही थी, खिड़की के पास प्लास्टिक के कुछ फूल झूल रहे थे, कुछ मुरझाये हुए थे,…

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“खामोशियाँ”

दोनों काली मलमल ओढ़े, एक पहाड़ की चोटी पर, चुपचाप से बैठे थे... शायद एक दूसरे की, ख़ामोशी बाँट रहे थे... एक की "ख़ामोशी" थक चुके ज़ख्मों की थी, तो…

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“कहानी एक बंजारे और चांदनी की”

वो चांदनी से प्यार करता था, जानते हुए की दाग से लिपटे चाँद की हैं वो, काले बादल दरमियान दोनों के रोके पहाड़ों से हैं खड़े, जानते हुए की तारों…

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“बारिश”

घर से निकलते ही, यादों की जोरों से बारिश होने लगी, मैंने छतरी साथ नहीं राखी थी, पूरा ही भीग गया, कुछ बुँदे मखमली चादर ओढ़े हुए थे, तो कुछ…

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