ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

वो अब बड़ी हो चुकी है-कविता

वो मोहल्ले की गलियाँ  जिन्हें अपने नन्हें क़दम से नापा करती थी,  वो मकान की दीवारें  जिस पर कलम से लकीरें खिंचा करती थी,  वो माँ की बरनियाँ जिससे मुरब्बा…

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वो सुनहरे अल्फ़ाज़ों की नज़्म बन गई – कविताएँ

1.पहला ख़याल  मैंने मोहब्बत की है  तुम्हें पाने की ज़िद नहीं, तुम मेरी तख़्लीक़ का  पहला ख़याल हो  कोई आदत नहीं, दूरियों से ख़ामोशी  में की गई मोहब्बत  भी किसी से…

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“इश्क़ की मिश्री” पाँच कविताएँ – Shailism

1. "बारिश"  घर से निकलते ही, यादों की जोरों से बारिश होने लगी, छतरी मैंने साथ नहीं रखी थी, पूरा ही भीग गया, कुछ बूँदे मखमली चादर ओढ़े हुई थी  ,…

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“गोश्त”

अब आदत हो गई थी उसे, किवाड़ खुलने पर, अब वो सहमा नहीं करती थी, रात भर गोश्त के टुकड़े सी वो पड़ी रहती थी, कुत्ते आते और चाट जाते…

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” Feminist “

ज़ोर-ज़ोर से बातें कर रही है , शायद सच ही कह रही है आवाज़ जो इसकी इतनी ऊँची है, इसके माथे पर बड़ी सी बिंदी है, स्कॉर्फ़ पशमीना है शायद,…

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“दरवाज़े का सिपाही”
Labrador Puppy Head On in Black and White against a Black Background; Shutterstock ID 10488424; PO: aol; Job: production; Client: drone

“दरवाज़े का सिपाही”

बस कुछ रोटी के टुकड़े ही डाले थे उसे और वो मेरे दरवाज़े का सिपाही बन गया, अब घर से निकलते ही मेरे वो साथ कुछ दूर तक सड़क नापता…

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“ख्वाहिशें”

उसके बाद तुम्हारी ख्वाहिशें पूरी करेंगे, हम मिल कर उन अधूरे सपनो और टूट चुके तारों को जोड़ेंगे, फिर एक नया आसमान बनायेंगे जिसे अपने ही रंगो से हम सजाएँगे,…

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” मुझे मंज़ूर नहीं “

मैं बेजान ही सही, पर तुमसा ज़िंदा, होना मुझे मंज़ूर नहीं... मैं पाताल ही सही, पर तुमसा अभिमानी आकाश, होना मुझे मंज़ूर नहीं... मैं अँधेरा ही सही, पर तुमसा मतलबी…

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