ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
कलियुग के अंत के बाद संसार और मनुष्य का क्या होगा ?- श्री हनुमान की कथा

कलियुग के अंत के बाद संसार और मनुष्य का क्या होगा ?- श्री हनुमान की कथा

शास्त्रों के अनुसार चार युग होते हैं जिसमें अंतिम युग कलियुग है और कलियुग की समाप्ति के बाद फिर से सतयुग का आगमन होता हैमतलब संसार की समाप्ति होगी और फिर से उसका निर्माण होगा यह एक चक्र है किंतु भविष्य का संसार कैसा होगा? मनुष्य का जीवन कैसा होगाइन प्रश्नो का उत्तर रामायण के श्री हनुमान की इस कथा में है।

कथा-राम की अँगूठी

पृथ्वी छोड़ने और इस जीवन से मुक्त होने का समय आ गया है यह बात श्री राम को ज्ञात हो चुकी थी वह जीवन मृत्यु के चक्र को भली भाती जानते थे उन्होंने कहा “यम को मुझ तक आने दिया जाए धरती छोड़ वैकुण्ठ जाने का समय आ चुका है

पर मृत्यु के देव यम का श्राम तक पहुँचना असंभव था क्योंकि राम के महल के द्वार पर श्री हनुमान प्रहरा दे रहे थे राम को उनसे कोई दूर नहीं ले जा सकता था। अब राम के लिए अपने भक्त और मित्र हनुमान को द्वार से हटाना आवश्यक हो गया था, ताकि यमदेव महल में प्रवेश कर सकें। इसलिए श्री राम ने अपनी अँगूठी महल के फ़र्श के एक दरार में गिरा दी और हनुमान से उसे खोज लाने का अनुरोध किया।

हनुमान ने तुरंत सूक्ष्म रूप धारण किया और उस दरार के भीतर चले गए। अंदर जाते ही उन्हें ज्ञात हुआ कि यह कोई मामूली दरार नहीं बल्कि नाग लोक तक जाने वाला सुरंग है। नाग लोक पहुँच हनुमान जी ने वासुकि जो कि नाग लोक के राजा थे को प्रणाम किया और अपने वँहा आने का कारण बताया।

वासुकि उन्हें नाग लोक के मध्य भाग में ले कर गए। जँहा अँगूठियों के ढेर का पहाड़ बना हुआ था। वासुकि ने कहा “यँहा आपको श्री राम की अँगूठी मिल जायगी।”

हनुमान सोचने लगे की इस पहाड़ में श्री राम की अँगूठी को खोज पाना वैसा ही जैसे किसी भूसे के ढेर में एक  सुई को खोज पाना। किंतु सोभाग्य से उन्होंने जो पहली अँगूठी उठाई वह श्री राम की निकली। उन्हें हर्ष के साथ आश्चर्य भी हुआ। उन्होंने एक और अँगूठी उस ढेर से उठाया वह भी श्री राम की अँगूठी थी। वास्तव में वो सारी अँगूठियाँ राम की ही थी।

हनुमान ने वासुकि से पूछा “इसका मतलब क्या है?”

वासुकि मुस्कुराए और बोले “ जिस संसार में हम रहते है। वह सृष्टि और विनाश के चक्र से चलती है। इस संसार के एक जीवन चक्र को एक अल्प कहा गया है। और हर अल्प में चार (सतयुग, त्रेतायुग , द्वापरयुग और कलयुग) युग होते हैं।त्रेतायुग में राम, अयोध्या में जन्म लेते है। फिर एक दिन उनकी अँगूठी गिर कर सुरंग के मार्ग से होती हुई नाग लोक तक पहुँच जाती है। उसे खोजते हुए एक बन्दर आता है और वँहा राम की मृत्यु हो जाती है। यह सेकडों और हज़ारों कल्पों से चली आ रही अँगूठियों का ढेर है। यह सभी अँगूठियाँ श्री राम की है। भविष्य के रामों की अँगूठियों के लिए यँहा बहुत जगह है।”

हनुमान समझ गए की उनका नाग लोक में आना और अँगूठियों के पहाड़ से साक्षात होना कोई आकस्मिक घटना नहीं है। यह श्री राम का उनको समझाने का मार्ग है कि मृत्यु को आने से कोई नहीं रोक सकता। राम का अंत होगा। संसार का अंत होगा। किंतु जितनी बार संसार का जन्म होगा उतनी ही बार राम का भी जन्म होगा।और यह प्रक्रिया अनंत काल तक चलती रहेगी।

* राम और हनुमान की इस कथा से अनुसार हर अल्प के सतयुग में रामायण होता आया है। जिसमें राम का जन्म हुआ है तो निस्चित ही सीता, हनुमान और रावण का भी जन्म फिर से हुआ होगा। फिर से वही कथा दुहराई गई होगी। फिर से वनवास हुआ होगा, सीता हरण हुआ होगा और रावण का अंत हुआ होगा।और आने वाले अल्प में यही घटना फिर से घटेगी।
हम भी कलियुग का एक हिस्सा है। हमने भी इस संसार में जन्म लिया है। हनुमानजी की इस कथा की तरह क्या हर अल्प में हम भी जन्म लेते आए हैं और हर अल्प में हमारा यही जीवन और यही कहानी रही है। क्या हर बार मैं यह कहानी लिखता रहा हूँ और आप पढ़ते रहे हैं। क्या यह क्षण हर अल्प में स्वयं को दोहराता आया है। अगर इसके बारे में आपको और कोई जानकारी हो तो comment box में लिखें।

Leave a Reply

Close Menu
%d bloggers like this: