Category: Poems

” Feminist “

ज़ोर-ज़ोर से बातें कर रही है , शायद सच ही कह रही है आवाज़ जो इसकी इतनी ऊँची है, इसके माथे पर बड़ी सी बिंदी है, स्कॉर्फ़ पशमीना है शायद,…
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“दरवाज़े का सिपाही”

बस कुछ रोटी के टुकड़े ही डाले थे उसे और वो मेरे दरवाज़े का सिपाही बन गया, अब घर से निकलते ही मेरे वो साथ कुछ दूर तक सड़क नापता…
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“ख्वाहिशें”

उसके बाद तुम्हारी ख्वाहिशें पूरी करेंगे, हम मिल कर उन अधूरे सपनो और टूट चुके तारों को जोड़ेंगे, फिर एक नया आसमान बनायेंगे जिसे अपने ही रंगो से हम सजाएँगे,…
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मुझे मंज़ूर नहीं…

मैं बेजान ही सही, पर तुमसा ज़िंदा, होना मुझे मंज़ूर नहीं... मैं पाताल ही सही, पर तुमसा अभिमानी आकाश, होना मुझे मंज़ूर नहीं... मैं अँधेरा ही सही, पर तुमसा मतलबी…
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” केद इश्क़ “

इश्क़ बंद हो चला है, अब कीपैड की दुनिया में, स्क्रीन पर क़समें खाई जाती है, और इन्बाक्स में दिल धड़कते हैं, फूल भी खिलते हैं वँहा, अब सुबह स्याम…
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Ek Din

जो धूल पैरों पर है लगी तेरे, वो जानती है, तू उसे ज़मीन बना देगा, इतनी आग है तुझमें, कि एक दिन, तू असमां पिघला उस पर बरसा देगा।
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पापा (Father)

नीला फ़्रॉक बसता पहने, मैं रोती-रोती  घर पहुँची, घुटना छिल चुका था मेरा, दरवाज़ा खोल आवाज़ मैंने दी, पापा-पापा देखो मैं गिर पड़ी, प्रत्युत्तर में ख़ामोशी थी, खारी बूँदे अब…
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“कठपुतलिया”

कुछ कठपुतलिया थी वँहा, रंगीन कपड़ों से सजी थी, मगर किसी की उँगलियों से वो बंधी थी, कुछ बेजान सी थी, तो कुछ सांस ले रही थी...
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“झूलता वक़्त”

अक्सर देखा है वक़्त को झूलते हुए मैंने, कभी दीवार पर तो कभी धागों का सहारा लिए बाजार में, पर समझ नहीं आता की जो झूल रहा है वो वक़्त…
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“Yatra”

पेड़ों की गुफा में, आधी छांव आधी धुप से, गुजरता वो बंजारा, कभी तो कंही पहुंचेगा...
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