Category: Poems

“कठपुतलिया”

कुछ कठपुतलिया थी वँहा, रंगीन कपड़ों से सजी थी, मगर किसी की उँगलियों से वो बंधी थी, कुछ बेजान सी थी, तो कुछ सांस ले रही थी...
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“झूलता वक़्त”

अक्सर देखा है वक़्त को झूलते हुए मैंने, कभी दीवार पर तो कभी धागों का सहारा लिए बाजार में, पर समझ नहीं आता की जो झूल रहा है वो वक़्त…
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“Yatra”

पेड़ों की गुफा में, आधी छांव आधी धुप से, गुजरता वो बंजारा, कभी तो कंही पहुंचेगा...
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“खिलोने वाला”

काला था वो मगर, रंग बेच रहा था, नंगे पांव में छाले थे उसके मगर, चकरी वाले पंख सोप रहा था, नकाब भी थे उसके पास मगर, चेहरे पर चढ़ा…
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“I Am Human”

"एक दिल है मेरे पास तू रख ले, मैं इंसान हूँ दिल की नहीं दिमाग की सुनता हूँ," ऐसा एक इंसान ने एक कुत्ते से कहा...
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“डर”

डर लगता है ना, मुझे भी लगता था, पर मैं उसे निगल गया, डर अब मुझसे डरता है, आपने सुकून के लिए अब वो, मेरी एक फूंक के लिए तड़पता…
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“पहचान पाये”

मकानों को टुटा बिखरा देखा है ? खून के धब्बों से रंगी ज़मीन? खम्बों पर लटकते अध नंगे शरीर? देखा ज़रूर होगा, कई किस्से होते हैं ऐसे, मज़हब के नाम…
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“जड़े”

उसने ज़मीन साफ़ कर खुद के माकन और दीवारे बनाली, बिना सोचे ये की एक जान अब भी जमी है उसी ज़मीन में, उस जान ने भी ज़िंदा रहने अपनी…
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“एक”

क्या हम किताबों में लिखी बातों को जानते हैं ?, हाँ ?, तो फिर क्यों "हम सब एक" को नहीं मानते हैं ?, क्यों हम तीन और चार हो जाया…
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“तुम्हारे हिस्से के तारें”

अगर आज धुंध कम होगी तो, तुम्हे आपने हिस्से के आसमान के, कुछ सितारे भेजूंगा... जानता हूँ तुम्हारे हिस्से के तारें, काले बादलों की कैद मैं हैं...
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