ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
“Buri Adaat”

“Buri Adaat”

ना जाने क्यों इन इंसानी नज़दीकियों से,

जल्द ऊब जाता हूँ मैं,

शायद यह आदत बुरी है मेरी,

यह जान कर भी मैं,

इसे बदलना नहीं चाहता,

शायद खुदा मैं बना नहीं चाहता

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