ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
भगत सिंह- एक क्रांतिकारी कवि की जेल डायरी
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भगत सिंह- एक क्रांतिकारी कवि की जेल डायरी

19 साल की उम्र में ही उसकी शादी तय हो गई थी। किंतु उसने यह बोल कर घर छोड़ दिया कि “आज़ादी ही उसकी दुल्हन है।” और देश की आज़ादी के लिए वह एक मृत्यु मार्ग पर चल पड़ा। वो मार्ग जिस पर चल कर वह अमर हो गया। वह कोई और नहीं बल्कि पंजाब के लायलपुर गाँव ( जो अब पाकिस्तान में हैं ) में रहने वाले एक नव जवान शहीद भगत सिंह थे।

देश सेवा के लिए घर छोड़कर निकलते हुए, भगत सिंह ने एक चिट्ठी में लिखा था –

“मेरा जीवन एक महान उद्देश्य के लिए समर्पित है और वह है देश की स्वतंत्रता। इसलिए कोई भी आराम या सांसारिक सुख मुझे नहीं लुभाता।”

Bhagat singh

                                                                                    Photo Custody

किस तरह वह चंद्रशेखर आज़ाद की स्वतंत्रा सेनानी की सेना का हिस्सा बने। और ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सोंडर्स की हत्या कर लाला लाजपत राय की मौत का बदला लिया। उसके बाद अपने साथी सेनानी बटुकेश्वर दत्त के साथ विधान सभा में बम फेंका। और फिर अंग्रेज़ों ने उन्हें और उनके बाक़ी साथियों को अपने गिरफ़्त ले लिए। और उन पर वह इतिहासिक अदालती मुक़दमा चला जिसने अंग्रेज़ी हुकूमत की रूह में कंपकंपी पैदा कर दिया था। उनके द्वारा किया गया जेल में 116 दिनों का उपवास भुलाए नहीं भूलता। और अंत में उन्होंने मात्र 24 वर्ष की उम्र में फाँसी के फंदे को हँसते हुए गले लगा लिया। उनके जीवन की इन क़िस्सों को तो हम सभी जानते हैं। पर क्या आप यह जानते हैं कि वह नव जवान क्रन्तिकारी एक कवि और लेखक भी था।

भगत सिंह ने जेल में रहते हुए चार किताबे लिखी थी। हालांकि, उनके द्वारा लिखी गयी सभी किताबें नष्ट हो गयी थी। पर उनकी डायरी बच गई। जिसमें उन्होंने कविताएं लिखी, लेख लिखे, नोट्स बनाये और साथ ही कुछ बेहतरीन लेखकों की कुछ अच्छी पंक्तियाँ भी लिखीं थी।

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‘द जेल नोटबुक एंड अदर राइटिंग्स’ किताब जो कुछ वर्ष पहले प्रकासित हुई है, में भगत सिंह द्वारा लिखी गयी कविताओं और बातों के बारे में लिखा गया है। जो उनके भीतर छुपे हुए कवि और लेखक को सामने लाती है ।

मैं नास्तिक क्यों हूँ” भगत सिंह द्वारा लेख मैं कुछ दिन पहले ही पोस्ट कर चुका हूँ।

भगत सिंह को किताबें पढ़ने का शोक हमेशा से था। जेल में बिताए वर्षों में उन्होंने कई किताबें पढ़ी। पड़ते वक़्त वह इन किताबों से उन विचारों और कविताओं को अपनी डायरी में नोट कर लेते थे जो उन्हें पसंद आती थी। साथ ही साथ उन्होंने इस डायरी में स्वयं की बुनी कविताएँ और लेख भी लिखे।

उनके पसंदीदा लेखकों में बर्नार्ड शॉ, बर्ट्रेंड रसेल, चार्ल्स डिकेंस, रूसो, मार्क्स, रवींद्रनाथ टैगोर, लाला लाजपत राय, विलियम वर्ड्सवर्थ, उमर खय्याम, मिर्जा गालिब और रामानंद चटर्जी शामिल थे।

भगत सिंह  की जेल-डायरी विभिन्न प्रकार के विषयों पर लिखे गये अंश, नोट्स और उदाहरणों से भरी है। जो न केवल उनकी विचारिक गंभीरता और बौद्धिक अंतर्दृष्टि को दर्शाती है। बल्कि उनकी सामाजिक और राजनीतिक चिंताओं को भी उजागर करती है ।

पूंजीवाद और समाजवाद जैसे विषयों से लेकर अपराध और क़ानूनी न्यायशास्त्र तक, उनकी डायरी में उनके लिखे गये अंश ये दर्शाते हैं कि युवा भगत सिंह ने कितना गहन अध्ययन किया था और वे अपनी उम्र से ज्यादा समझदार थे।

उन्होंने आज़ादी के बाद के भारत की चिंता भी उन्हें हमेशा लगी रहती थी। उन्हें डर था कि आज़ाद भारत के शासन कर्ता भी ब्रिटिश राज के शासन करता जैसे ही ना हो।

उनके द्वारा लिखे गये कुछ विचार और कविताओं का एक अंश यहाँ प्रस्तुत है :

मैं एक आदमी हूँ और इसलिए जो भी बात मानवजाति को प्रभावित करे, वह मुझे चिंतित करती है।

मैं इतना पागल हूँ कि जेल में भी आजाद हूँ।

प्रेमी, पागल और कवि एक ही तरह से बने होते हैं।

“ व्यक्ति को कुचलने से वे विचारों को नहीं कुचला जा सकता।

कानून की पवित्रता सिर्फ तब तक बरकरार है जब तक यह लोगों की इच्छा की अभिव्यक्ति है।

अगर बहरों को सुनाना है, तो धमाका करना ज़रूरी है। जब हमने बम फेंका तो हमारा इरादा किसी को मारना नही था। हमने ब्रिटिश सरकार पर बम फेंका था। अंग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ेगा और हमें आज़ाद करना पड़ेगा।

सामाजिक प्रगति कुछ लोगों के विद्रोह पर नहीं बल्कि समृद्ध लोकतंत्र पर निर्भर करती है। पुरे विश्व में भाईचारा केवल तभी प्राप्त किया जा सकता है जब अवसरों में समानता होसामाजिक, राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन में अवसर।

मुझे मुक्ति दो या मौत, क्या ज़िन्दगी इतनी प्रिय है, या फिर शांति इतनी प्यारी कि इसे बेड़ियों और दासता की कीमत पर खरीदा जाए ?”

ज़िन्दगी अपने सहारे जी जाती हैं।दूसरों के कन्धों पर तो जनाजे उठते हैं।

अपनी डायरी पर उन्होंने शार्लोट पर्किन्स गिलमैन की कविताचाइल्ड लेबरका एक अंश लिखा था प्रस्तुत है उसका अनुवाद

कोई भी नन्ही चिड़िया अपनी माँ को नहीं खिलाती,

कोई चूजा, मुर्गी को नही खिलाता

बिल्ली का बच्चा भी अपनी माँ के लिए चूहे पकड़कर नही ला सकता

यह सौभाग्य तो सिर्फ मनुष्यों को प्राप्त है ,

हम सबसे ज्यादा ताकतवर बुद्धिमान प्रजाति हैं

जाने कितनी ही देर तक हमारी प्रशंसा की जा सकती है

वह एकमात्र जीवित प्रजाति

जो अपने खाने के लिए अपने बच्चों पर निर्भर कर सकता है

फांसी से पहले उन्होंने अपने भाई कुलतार को भेजे एक पत्र में लिखा था

उन्हें यह फ़िक्र है हरदम, नयी तर्ज़ज़फ़ा क्या है ? हमें यह शौक है देखें, सितम की इंतिहा क्या है ?
दहर से क्यों ख़फ़ा रहें, चर्ख का क्या ग़िला करें। सारा जहाँ अदू सही, आओ मुक़ाबला करें।।

उनके विचारों से भरी यह डायरी पढ़ कर आपको यह मालूम पढ़ जाएगा की उनकी सोच उस वक़्त से कँही आगे की थी। और मुझे पूर्ण विश्वास है की अगर भगत सिंह ज़िंदा होते तो हिंदुस्तान को आज़ादी के लिए 1947 तक का इंतज़ार नहीं करना पड़ता वो आपनी दुल्हन जल्द ही घर ले आतेऔर उनकी क्रान्ति आज़ादी के बाद भी जारी रहती स्वतंत्र भारत के शासन कर्ताओं के विरुध

उस नव जवान शहीद को मेरा नमन !

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