ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
“बुरी आदत”

“बुरी आदत”

इस बार कुछ अलग हुआ,
मेरी आदत ने मुझे छोड़ दिया,
वो आदत तुम थी…

बड़ा इठलाई थी ना मुझे छोड़ते वक़्त,
मैंने भी कम ना था,
मैंने तुम्हे बुरी आदत का नाम दे दिया…

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