ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
” Feminist “

” Feminist “

ज़ोर-ज़ोर से बातें कर रही है ,

शायद सच ही कह रही है

आवाज़ जो इसकी इतनी ऊँची है,

इसके माथे पर बड़ी सी बिंदी है,

स्कॉर्फ़ पशमीना है शायद,

कुछ ऐंटीक गहने भी है

कान और गाले पर जो सजे है,

बड़ी दिलचस्प इसकी बोली है

ख़ुद को फ़ेमिनिस्ट बोलती है,

सब ने सुना तालियाँ भी बजाई,

पर मेरा हाँथ ना उठा

मैं ख़यालों में खो गया

कँही देखा है मैंने इसको ,

ये तो वही थी ना

जो उस दिन चौराहे पर

सबसे पहले भागी थी

जब एक औरत की

झुंड ने की पिटाई थी ,

एक पल के लिए ही सही

पर मोहतरमा मुड़ी थी,

उस भीड़ की तरफ़ दौड़ी थी,

पर बीच में ही रुक कर

ज़मीन से इसने कुछ उठाया था,

अरे यह वही पशमीना है

जिसे कंधे पर आज इसने है लगाया,

उस औरत को झुंड ने

चीन-भिन कर दिया था,

मगर एक दाग़ भी इसने

पशमीने पर आने ना दिया था,

खेर बोलती बड़ा दिलचस्प है,

वाह! क्या यह फ़ेमिनिस्ट है।

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