ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
“तड़प”

“तड़प”

वो जो तड़प रही है,
रूह है तेरी,
तू जिस्म को,
सहला रहा है,
नादान है क्या?

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