ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
“तुम्हे भी रोशन कर दूंगा मैं”

“तुम्हे भी रोशन कर दूंगा मैं”

तुम ही रख लो उस जलते सूरज को,
उन टूटने वाले तारों के झुण्ड को,
तुम ही रख लो उस दाग वाले चाँद को,
अँधेरा देना है, दे दो मुझे,

जो चिंगारी दफ़न है मुझमें,
मेरी साँसों के तूफान से भड़केगी ज़रूर,
फिर जब चमकेगा थका ज़िस्म मेरा सूरज बन कर,
न टूटने वाला जब वो सितारा बन जाऊंगा मैं,
जब बेदाग चाँद सा बिखरूँगा चांदनी बन कर,

तब मेरी रौशनी मांगने तुम आओगे ज़रूर,
पर मैं न हंसूंगा तुम पर इस तरह,
ना उस वक़्त मैं सौपूंगा तुम्हे इन अंधेरो को,
तब आपने जुगनु दे तुम्हे भी रोशन कर दूंगा मैं

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