ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
“डर”

“डर”

“डर” लगता है ना,
मुझे भी लगता था,
पर मैं उसे निगल गया,
डर अब मुझसे डरता है,
आपने सुकून के लिए अब वो,
मेरी एक फूंक के लिए तड़पता है…

तुम भी निगल के देखो,
एक बार खुद के डर को…

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