ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
“ख्वाहिशें”

“ख्वाहिशें”

उसके बाद

तुम्हारी ख्वाहिशें पूरी करेंगे,

हम मिल कर

उन अधूरे सपनो और

टूट चुके तारों को जोड़ेंगे,

फिर एक नया आसमान बनायेंगे

जिसे अपने ही रंगो से हम सजाएँगे,

एक चाँद उस पर टाँगेंगे

जो बेदाग़ सा होगा,

दो किरणें हर सुबह मिलेंगी

वो हम पर गिरेंगी,

अंधेरे से घिरे उस कोने को

हम फिर रोशन करेंगे,

एक नया जहान होगा

जहाँ हर लम्हा हम चुनेंगे,

और उस लम्हे में तुम-मैं

फिर से “हम” हो जाएँगे।

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