ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
” केद इश्क़ “

” केद इश्क़ “

इश्क़ बंद हो चला है,

अब कीपैड की दुनिया में,

स्क्रीन पर क़समें खाई जाती है,

और इन्बाक्स में दिल धड़कते हैं,

फूल भी खिलते हैं वँहा,

अब सुबह स्याम बस,

एक ऊँगली के टच से,

हर भावना अब तुम्हारी,

एक पिला गोल चहरा बतलाता है,

वह तुम्हारी  शक्ल बन स्क्रीन पर आता है,

पहले उस पिले चहरे की,

दोनो आँखों में दिल चमकता है,

फिर होंठों पर सरकता है,

फिर मुस्कान बनती है,

फिर इंतज़ार में कई बार वो,

इन्बाक्स में ही तड़पता है,

और फिर होंठ नीचे गिर जाते हैं,

आख़िर में दिल टूट जाता है,

और अगले दिन ही स्टेटस,

रिलेशन से सिंगल हो जाता है,

अब ज़माने को इश्क़,

ऐसे ही होता है,

क्योंकि वो बंद हो चला है,

अब कीपैड की दुनिया में

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