ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
कभी खुद से बातें की है

कभी खुद से बातें की है

कभी खुद से बातें की है

ज़रा कर के देखो

एक अरसा एक पल में गुज़र जाएगा

पर बातें खत्म न होंगी..

कई किस्से निकलेंगे

जो साथ गुज़ारे है तुमने

कुछ चटपटे से होंगे

तो कुछ थोड़े कड़वे से..

कभी नयन से

खारा पानी उमड़ेगा

तो हँसी फूटेगी कभी

उस वक़्त गूंज बनकर..

अफ़सोस भी होगा दोनों को

कई कोशिशो पर

तो कभी ख़ामोशी यूँही

कई पल घेर जाएगी..

किस्सों का काफिला यूँही

आगे बढ़ते जाएगा

और यूँही  चलते चलते

खुद का साथ तुम्हे फिर मिल जाएगा..

कभी खुद से बातें की है

ज़रा कर के देखो

यादों के ज़ख़्म

फिर से भर जाएंगे..

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