ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
“एक”
Shailism

“एक”

क्या हम किताबों में लिखी बातों को जानते हैं ?,
हाँ ?, तो फिर क्यों “हम सब एक” को नहीं मानते हैं ?,
क्यों हम तीन और चार हो जाया करते हैं ?…

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