ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
मंदिर-मस्जिद और रेत का मकान
By Arshad Mohsin

मंदिर-मस्जिद और रेत का मकान

* रेत का मकान वो बच्चा रेत का मकान बनाता  समुन्दर आता और उसे तोड़ जाता,  यह शिलशिला यूँही चलता रहा  मकान बनता और बिगड़ता रहा , मगर कुछ वक़्त बाद बच्चा…

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बीच की दीवार – कविता

दो बच्चे माटी में खेल रहे थे, एक ने मिट्टी का मंदिर  तो दूसरे ने मस्जिद बनाया , फिर दोनो के बीच में  एक दीवार भी उठाया,  एक ने श्री राम का…

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युद्ध में अर्जुन का श्री कृष्ण पर क्रोध करना-महाभारत कथा

जँहा क्षितिज पर सूर्य का प्रकाश फैला हुआ था। वँही कुरुक्षेत्र की रणभूमि महारथी कर्ण से प्रकाशित हो रही थी। कर्ण सूर्य की किरणो से भी त्रिव अपने बाणों को…

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क्यों किया था इन लोगों ने चौदह वर्षों तक श्री राम की प्रतीक्षा?-रामायण
Painting by Nagesh Goud

क्यों किया था इन लोगों ने चौदह वर्षों तक श्री राम की प्रतीक्षा?-रामायण

रामायण- चौदह वर्ष का वनवास: ‘राम को वनवास हो चुका है’, यह ख़बर अयोध्या में आग सी फैल चुकी थी। महल के मुख्य द्वार पर अयोध्या वाशीयों की भीड़ उमड़…

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इला – एक नारी की अनक़ही कहानी
Painting by Raja Ravi varma

इला – एक नारी की अनक़ही कहानी

लघु कथा  क्षितिज पर सूर्य देव की पहली किरण फूट चुकी थी। आधी सुख चुकी गोदावरी में खड़ी इला आँखे बंद कर उनको जल चढ़ा रही थी। सूरज की किरणे…

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वो अब बड़ी हो चुकी है-कविता

वो मोहल्ले की गलियाँ  जिन्हें अपने नन्हें क़दम से नापा करती थी,  वो मकान की दीवारें  जिस पर कलम से लकीरें खिंचा करती थी,  वो माँ की बरनियाँ जिससे मुरब्बा…

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शरीफ़ आदमी – हिंदी लघु कथा
Painting by Picasso

शरीफ़ आदमी – हिंदी लघु कथा

लघु कथा  “आप तो उन गलियों को पहचानते है। रोज़ का आना जाना है।” “हाँ बहुत अच्छी तरह से।” अकड़ते हुए कहा। “कहाँ-कहाँ का माल है वँहा पर?” “बंगाल, बिहार, पंजाब…

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वो सुनहरे अल्फ़ाज़ों की नज़्म बन गई – कविताएँ

1.पहला ख़याल  मैंने मोहब्बत की है  तुम्हें पाने की ज़िद नहीं, तुम मेरी तख़्लीक़ का  पहला ख़याल हो  कोई आदत नहीं, दूरियों से ख़ामोशी  में की गई मोहब्बत  भी किसी से…

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